शनिवार, 8 अक्टूबर 2016

shayri

महक महक फूलों की हो या फिर इंसान की , खिलने तक ही सुहानी लगाती है । कौन पूछता है मुरझाये हुए चेहरों को,जिंदगी सबको हंसती हुई अच्छी लगती है

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