बुधवार, 26 अक्टूबर 2016

दिल में "बुराई" रखने से बेहतर है, कि "नाराजगी" जाहिर कर जहाँ दूसरों को "समझाना" कठिन हो, वहाँ खुद को समझ लेना ही बेहतर है

मंगलवार, 11 अक्टूबर 2016

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शनिवार, 8 अक्टूबर 2016

shayri

महक महक फूलों की हो या फिर इंसान की , खिलने तक ही सुहानी लगाती है । कौन पूछता है मुरझाये हुए चेहरों को,जिंदगी सबको हंसती हुई अच्छी लगती है