Lokdastak
बुधवार, 26 अक्टूबर 2016
दिल में "बुराई" रखने से बेहतर है, कि "नाराजगी" जाहिर कर जहाँ दूसरों को "समझाना" कठिन हो, वहाँ खुद को समझ लेना ही बेहतर है
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