
विश्व के सबसे बडे लोकतांत्रिक देश भारत इस वक्त कई अग्नि परीक्षाओं से गुजर रहा है। देश की मोदी सरकार को देश के युवाओं को मेक इन इंडिया के तहत उनके सपनों को पूरा करने का बडा लक्ष्य पाना है वहीं पडोसी देश भारत के संयमता का इम्तिाहान लेने में जुटा हुआ है। वहीं विश्व मंच पर अपनी उपयोगिता साबित करने की कठिन चुनौती है। इन सबमें सबसे बडी चुनौता देश के अंदर बैठे ओछी राजनीतिक रहनुमा जो आये दिन कश्मीर से लेकर सर्जिकल स्ट्राईक ओर आतंकी एनकाउंटर का लेखा जोखा मांग रहे हैं। इन्हे इन हरकतों से देश की साख को कितना आघात पहुंचेगा,इसका अंदाजा इनको नहीं है। इनको सिर्फ अपने वोट बैंक की चिंता है। चैनलों पर राष्ट्रवादी भावना के बडे बडे बोल बोलने वाले ये नेता क्या कह रहे हैं इन्हे खुद पता नही है या फिर जानबूझकर बोला जा रहा है। स्तरहीन राजनीति करने वाले आतंकियों को समर्थन देने से नही चूक रहे हैं। 30 दिसम्बर की रात में करीब दो बजे प्रतिबंधित आतंकी संगठन सिम्मी के आठ खूंखार आतंकी मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के सेंट्रल जेल से एक जेल के सुरक्षाकर्मी की हत्याकर भागने में सफल रहे। पुलिस व एटीएस टीम ने भागने के 10 घंटे के अंदर जेल से 15किमी0 स्थित पहाडी पर छिपे आतंकियों को एनकाउंटर में मार गिराया । फिर क्या था पूरी घटना की लोगों को जानकारी भी नही हुई कि कैसे क्या हुआ कि कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव दिग्विजय सिंह व कांग्रेस वरिष्ठ नेता कमलनाथ व ओवैसी ने पूरे एनकाउंटर पर ही सवाल खडा कर दिया। इतना ही नही सभी दलों नेता सत्ताधारी भाजपा को पानी पी पी कर कोसना शुरू किया कि एनकाउंटर फर्जी था। उनमें सीपीआईएम की बृन्दाकरात,आप के मुखिया व दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल शामिल हैं। इतना हो हल्ला होने का कारण सिर्फ ये है कि मारे गये आतंकी अल्पसंख्यक समुदाय के हैं।जबकि मुख्यमंत्री शिवराज चैहान ने एनआईए से जांच कराने की बात किया है। ऐसा पहली बार नही हुआ है कि आतंकियों का साथ इन ओछी राजनीति करने वाले नेताओं ने दिया हो। इससे पूर्ब इशरतजहां काण्ड, बटाला एनकाउंटर, अफजल गुरू, सर्जिकल स्ट्राईक तक पर इन सेकुलर नेताओं सवाल उठाये हैं। इनका मानना है कि भागे आतंकियों को बुलाकर बैठाया जाना चाहिए और पूछना था कि आप क्यों भागे क्या जेल में कोई तकलीफ थी। आतंकियों को हाफिज सईद साहब से शब्द बोलने वाले अपने देश के जवानों की कार्यवाही का हिसाब मांगने वाले ऐसे नेताओं पर देशद्रोह का मुकदमा होना चाहिए। इन्ही वक्तव्यों के चलते एक आतंकी मां ने बेटे को शहीद की उपाधि दे डाली। अगर ऐसे गद्दार नेता देश में रहे तो वो दिन दूर नही कि आतंकियों की भी शहीद का दर्जा मिलने लगेगा। अरे कुछ तो शर्म हया है कि नही जवानों की शहादत पर तालू चिपक जाती है और आतंकियों के लिए आवाज निकलने लगती है और बताते हैं कि हमसे बडा देश भक्त कोई नही है। लोकतंत्र में कहने का अधिकार है तो इसका मतलब ये नही कि देश की व्यवस्था पर ही सवाल खडा करो,आतंकियों का समर्थन करो। भारत सरकार से गुजारिश है कि ऐसे लोगों को जो अपने ही देश की अस्मिता पर सवाल उठा रहे हैं,उन्हे सलाखों के पीछे होना चाहिए।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पूर्व केंद्रीय मंत्री सैफुदद्दीन सोज का बयान ...बुरहान को मारना नही चाहिये था वो भारत व पाक के रिश्तों में पुल का काम करता। हद हो गई कांग्रेस के नेताओं की इनकी सोच आतंकियों से मेल खाती दिख रही है। दिग्गविजय, मणिशंकर अय्यर, गुलाम नवी आजाद, पी चितंबरम, संजय निरुपम आदि नेताओं ने सोच लिया है कि हम बात करेंगे तो सिर्फ मुस्लिम तुष्टीकरण की ,चाहे क्यों न आतंकियों का ही समर्थन करेंगे। पहले पाकिस्तान व हुर्रियत नेताओं के लिए बुरहान हीरो दिख रहा था । अब तो कांग्रेस नेता भी इसे हीरो मानते हुए एन्काउन्टर को गलत बता कर सेना की कार्यवाही पर सवाल खड़ा कर दिया ऐसा पहली बार नही हो रहा है ।पहले भी सेना के सर्जिकल स्ट्राइक पर कांग्रेस ने सवाल उठा चुका है। क्या हो गया है कांग्रेस को क्या ये वही कांग्रेस है जिसका सैकड़ों साल का आजादी से भरा गौरवशाली इतिहास रहा है , आज वो बुरहान जैसे आतंकी का पक्ष लेता दिख रहा है। अन्य दल भी दूध के धुले नही हैं। पीडीपी जैसी पार्टी जो हमेशा सस्ती राजनीति के लिए हुर्रियत से लेकर आतंकवादियों तक साथ देने में पीछे नही रही है। जम्मू-कश्मीर सरकार की मुख्यमंत्री व पीडीपी की मुखिया महबूबा मुफ़्ती की जबान बुरहान को आतंकी कहने में तालू चिपक जाती है। उसी भाषा में गठबंधन में सहयोगी पार्टी और अपने को सबसे बड़ा देश भक्त कहने वाली बीजेपी के जम्मू कश्मीर के उप मुख्यमंत्री निर्मल कुमार ने एनकाउंटर के बाद इस पर बोलने से कतराते दिखे थे। आतंकी व हुर्रियत के पत्थरबाजों की समर्थक पार्टी से बीजेपी की क्या मजबूरी है की साझे की सरकार चलती रहे। अब बात एक बार फिर कांग्रेस की जाय कि देश इतनी जिम्मेदार पार्टी के दिग्गज नेताओं की अनाप शनाप बयान बाजी सिर्फ व्यक्तिगत राय के आड़ में चलती रहेगी या ये एक सोची समझी चाल भर है। चन्द वोटों की खातिर देश के राजनीतिक दल अपना रवैया नही बदला तो देश के हालात जम्मू कश्मीर व पश्चिम बंगाल के जैसे बेकाबू हो जायेंगे।सोज जैसे लोगों को देश द्रोह का मुकदमा दर्ज कर सलाखों के पीछे भेज देना चाहिये ।जिससे ऐसी हिमाकत कोई दूसरा न कर सके।
@नीरज सिंह